पुस्तक_समीक्षा #हमारे_गांव_में_हमारा_क्या_है! एक यक्ष प्रश्न । - कश्मीर सिंह #सर्वप्रथम, हमारे गांव में हमारा क्या है! संग्रह की शीर्षक कविता का एक अंश देखिए - “ये खेत मलखान का है, वो ट्यूबवेल फूल सिंह की है, ये लाला की दुकान है, वो फैक्ट्री बंसल की है, ये चक धुम्मी का है, वो ताप्पड़ चौधरी का है, ये बाग़ खान का है, वो कोल्हू पठान का है, ये धर्मशाला जैनियों की है, वो मन्दिर पंडितों का है, कुछ इस तरह से जाना हमने अपने गाँव को l” “हमारे गाँव में हमारा क्या है ! ये हम आज तक नहीं जान पाए।” “उक्त काव्य पंक्तियों और कविता संग्रह के रचयिता हैं- अमित धर्मसिंह l अमित धर्मसिंह एक मँजे हुए कवि हैं। इनकी कविताएँ साहित्यिक अनुसन्धान केंद्र की प्रयोगशाला में तैयार होकर नहीं आयी बल्कि यथार्थ के धरातल पर समस्याओं से दो-दो हाथ करती, हृदय की हर धड़कन...